रविवार, 6 अप्रैल 2014

तुम....सातवां पन्ना

तुम....


 झरनों के संगीत में हो तुम...
नदियों के हर गीत में हो तुम...
सूरज की चाहत में पागल...
सूरजमुखी की प्रीत में हो तुम...
हां तुम! बस तुम!

मेरी सुबहो-शाम में हो तुम...
मेरे हर एक काम में हो तुम...
मंदिर, मस्जिद और गुरूद्वारे...
ईश्वर, अल्ला, राम में हो तुम...
हां तुम! बस तुम!

जीने के हर ढंग में हो तुम...
खुशियों के हर रंग में हो तुम...
हार में हो, हर जीत में हो...
मेरी हर इक जंग में हो तुम...
हां तुम! बस तुम!


शुभम् शुक्ला

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