अधूरा हूं हर पल साथ तेरे मैं
फिर भी जाने साथ नहीं तुम..
कैसे कह दूं सखी वो नटखट..
जीवन में मेरे मित्र नहीं तुम..
अलबेली सी उठी है प्यास ये मेरी..
कुआं खेत में खोज रही तुम..
मुस्कान समेटे उन गालों पर..
खिल उठे जो अरमान हो तुम..
सदियों से जीया है मैंने जिसको..
खामोशी भरी सांस हो तुम..
सोचता रहता हल पर तुमको..
सिमटी रात का ख्वाब हो तुम..
उजला जीवन क्यूं है ऐसा..
साथ होकर भी साथ नहीं तुम..
कैसी ये कसक है दिल की..
जिसमें आंह भर रही हो तुम..
उठ खड़ा हो जा रे पगले..
खेल रही हर आंगन में तुम..
भीग रहा जिस बारिश में..
बरसात की पहली बूंद हो तुम..
न पल वो ठहरा न रात वो ठहरी..
सिखुड़ती गई वो ओस हो तुम..
आज एहसास सिर्फ हुआ तुम्हारा
अधूरा हूं पर साथ नहीं हो तुम...
शुभम् शुक्ला
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