शादी और पत्रकारिता....अजीबो गरीब संगम
शादी और पत्रकारिता अजीबो गरीब संगम प्यारे,
जिसको लड़की मिल गई समझो उसके वारे न्यारे..
रिश्ता लेकर पहुंचे इक जनाब, बोले लड़का करता क्या है,
सज्जन से पिताजी बोले बेटा... पत्रकार है..
सोच में पड़े लालाजी, बोले पत्रकार से रिश्ता न कर पाऊंगा,
मांग करोगे तुम मोटी, तो दहेज कहां से लाऊंगा..
पत्रकारिता से बैर क्यों ना जाने, सुनते लालाजी खड़े हुए,
मां बोली ये पहले थोड़ी, जो पत्रकार सुन भाग खड़े हुए..
पिताजी बोले देखना, इक दिन अच्छा रिश्ता आएगा,
न जाने कब बहुरेंगे दिन और पत्रकार शादी कर पाएगा...
चिंता न कर बेटे की मां, चिंता चिता समान है,
पत्रकार की मां हूं बोली, क्या बस यही सम्मान है..
लल्लन की मां भी बनी है सास, देखो कैसे लबलबाती है,
बेटा अच्छी नौकरी करता और बहु सेक रोटी रोज खिलाती है..
पत्रकार ये कैसा पद है, समझ किसी के ना आएगा,
अब लगता शादी बेटा, कभी तू न कर पाएगा..
पत्रकार की सुनिए....
पिताजी, पत्रकार का प्यार कलम और सिद्धांत खबर है,
बेटा शादी कर ले कैसे भी, तेरी यही उमर है..
पिताजी देखो शादी तो अब मैं कर ना पाऊंगा,
पत्रकार बना हूं इसलिए, शायद कुंवारा ही मर जाऊंगा..
बेटा ना कह ऐसा, इक आस तो हमारे मन में है,
क्या करूं पिताजी, पत्रकारिता मेरे भी तन-मन है..
पत्रकार क्या बना दिया तुझको, अब हमारी नहीं सुनता तू,
जगह-जगह शहनाई बजी है, लेकिन तेरे कानों पर नहीं रेंगती जूं..
कौन करेगा शादी मुझसे बोले पत्रकार प्यारे...
जिसको मिल गई लड़की समझों उसके वारे न्यारे....
अगर आपके दिलों को छुई हो तो कमेंट जरूर कीजिएगा...
आपके प्यार के इंतजार में
शुभम् शुक्ला
जिसको लड़की मिल गई समझो उसके वारे न्यारे..
रिश्ता लेकर पहुंचे इक जनाब, बोले लड़का करता क्या है,
सज्जन से पिताजी बोले बेटा... पत्रकार है..
सोच में पड़े लालाजी, बोले पत्रकार से रिश्ता न कर पाऊंगा,
मांग करोगे तुम मोटी, तो दहेज कहां से लाऊंगा..
पत्रकारिता से बैर क्यों ना जाने, सुनते लालाजी खड़े हुए,
मां बोली ये पहले थोड़ी, जो पत्रकार सुन भाग खड़े हुए..
पिताजी बोले देखना, इक दिन अच्छा रिश्ता आएगा,
न जाने कब बहुरेंगे दिन और पत्रकार शादी कर पाएगा...
चिंता न कर बेटे की मां, चिंता चिता समान है,
पत्रकार की मां हूं बोली, क्या बस यही सम्मान है..
लल्लन की मां भी बनी है सास, देखो कैसे लबलबाती है,
बेटा अच्छी नौकरी करता और बहु सेक रोटी रोज खिलाती है..
पत्रकार ये कैसा पद है, समझ किसी के ना आएगा,
अब लगता शादी बेटा, कभी तू न कर पाएगा..
पत्रकार की सुनिए....
पिताजी, पत्रकार का प्यार कलम और सिद्धांत खबर है,
बेटा शादी कर ले कैसे भी, तेरी यही उमर है..
पिताजी देखो शादी तो अब मैं कर ना पाऊंगा,
पत्रकार बना हूं इसलिए, शायद कुंवारा ही मर जाऊंगा..
बेटा ना कह ऐसा, इक आस तो हमारे मन में है,
क्या करूं पिताजी, पत्रकारिता मेरे भी तन-मन है..
पत्रकार क्या बना दिया तुझको, अब हमारी नहीं सुनता तू,
जगह-जगह शहनाई बजी है, लेकिन तेरे कानों पर नहीं रेंगती जूं..
कौन करेगा शादी मुझसे बोले पत्रकार प्यारे...
जिसको मिल गई लड़की समझों उसके वारे न्यारे....
अगर आपके दिलों को छुई हो तो कमेंट जरूर कीजिएगा...
आपके प्यार के इंतजार में
शुभम् शुक्ला
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