रविवार, 6 अप्रैल 2014

तुम... कविता का दूसरा पन्ना

भीग रहा था ओस मे मैं..
बरसाती बन आई थी तुम..
थम न जाए रात ये प्यारी...
साथ जिसमें चल रही थी तुम..
तन्हाई बरपी थी उस रात में..
आंह सूखी भर रही थी तुम..
रात थी, हो रहा था हल्का सवेरा..
दूर मुझसे हो रही थी तुम..
सितारे जगमगाए, हुआ रोशन समां..
पलट कर जब देख रही थी तुम..
बलखाती, इतराती, रात संवर जा..
सुबह की राह देख रही थी तुम..
लंबे केश तुम्हारे वो झरना..
जिनकी ओट में छुप रही थी तुम..
मिल जाती रात वो लंबी..
धुमिल धुआं सी न होती तुम..
भीग रहा था जिस ओस में मैं..
साथ उसे ले गई थी तुम..
लगा दो विराम जीवन पर मेरे..
कुछ नहीं जो पास नहीं हो तुम..
भीग रहा था ओस मे मैं..
बरसाती बन आई थी तुम..
 

शुभम् शुक्ला

तुम....

तुम....

October 31, 2011 at 10:30am
लम्हा लम्हा वक्त गुजरता..
पनघठ पर गीत गुनगुनाती तुम..
रोज सुनता गीत तुम्हारे..
अगर शाम होते आती तुम..
मनचली हर एक अदा तुम्हारी..
इठलाती, शर्माती तुम..
क्यूं न मदहोश हो जाऊं मैं..
खुली ज़ुल्फ लहराती तुम..
सुबह की पहली किरण है जागी
काश मुझे रोज जगाती तुम..
अलबली सी बन बैठ मुझे..
कभी हंसाती कभी रूलाती तुम..
कहानियां किस्से बहुत सुने थे..
हकीकत मुझे समझाती तुम..
वक्त न ठहरा पास मेरे वो..
ठहरी मेरे पास थी तुम..
रोज होता दिदार तुम्हारा
आयना वो छोड़ गई थी तुम..
खुद न जागा मैं उन रातों में..
मुझे जगाया जिसने वो थी तुम..
प्यार मैं करता बहुत तुम्हे था..
प्यार करती कतराती तुम...
आज भी सोचता दिल ये मेरा..
काश मेरी हो जाओ तुम..
लम्हा लम्हा वक्त गुजरता..
पनघठ पर गीत गुनगुनाती तुम..


शुभम् शुक्ला

ऑनलाइन प्यार पर मेरा 'खास' व्यंग्य गीत


आज के मंजनू और लैला का केवल एक ही रोना है..

प्यार मोहब्बत सबकुछ इनको ऑनलाइन ही होना है..

न देखें सूरत पहले, न सीरत पहचानेंगे..

न समझेंगे एक-दूजे को, न थोड़ा सा जानेंगे..

बाते-वातें मिलना-मिलाना इनका तो वीडियो चैट पर होना है

...............प्यार मोहब्बत सबकुछ इनको ऑनलाइन ही होना है...



प्यार करूं मैं तुझसे इतना, इंटरनेट भी बंद करूं..

नहीं उठाऊं फोन किसी का, एसएमएस भी चंद करूं..

तेरे प्यार में पागल मेरे सेलफोन का कोना-कोना है...

........प्यार मोहब्बत सबकुछ इनको ऑनलाइन ही होना है...



मैसेज लिखते दो मिनट, फिर थोड़ा सा वेट करें..

कभी लिखे ये लव-यू, लव-यू, कभी-कभी हेट करें..

फिर आधा घंटा बैठ के सोचें, SMILEY कैसा पिरोना है...

.........प्यार मोहब्बत सबकुछ इनको ऑनलाइन ही होना है...



सौ-सौ बार गिरा के मैनें मोबाइल फिर जोड़ा है..

फोन काटके तुमने मेरे दिल को कितना तोड़ा है..

अरे मोबाइल की बात करो, तुम दिल तो महज खिलौना है..

........प्यार मोहब्बत सबकुछ इनको ऑनलाइन ही होना है...



आज के मंजनू और लैला केवल एक ही रोना है..

प्यार मोहब्बत सबकुछ इनको ऑनलाइन ही होना है...



शुभम् शुक्ला

शादी और पत्रकारिता....अजीबो गरीब संगम

शादी और पत्रकारिता....अजीबो गरीब संगम



शादी और पत्रकारिता अजीबो गरीब संगम प्यारे,
जिसको लड़की मिल गई समझो उसके वारे न्यारे..
रिश्ता लेकर पहुंचे इक जनाब, बोले लड़का करता क्या है,
सज्जन से पिताजी बोले बेटा... पत्रकार है..
सोच में पड़े लालाजी, बोले पत्रकार से रिश्ता न कर पाऊंगा,
मांग करोगे तुम मोटी, तो दहेज कहां से लाऊंगा..
पत्रकारिता से बैर क्यों ना जाने, सुनते लालाजी खड़े हुए,
मां बोली ये पहले थोड़ी, जो पत्रकार सुन भाग खड़े हुए..
पिताजी बोले देखना, इक दिन अच्छा रिश्ता आएगा,
न जाने कब बहुरेंगे दिन और पत्रकार शादी कर पाएगा...
चिंता न कर बेटे की मां, चिंता चिता समान है,
पत्रकार की मां हूं बोली, क्या बस यही सम्मान है..
लल्लन की मां भी बनी है सास, देखो कैसे लबलबाती है,
बेटा अच्छी नौकरी करता और बहु सेक रोटी रोज खिलाती है..
पत्रकार ये कैसा पद है, समझ किसी के ना आएगा,
अब लगता शादी बेटा, कभी तू न कर पाएगा..
पत्रकार की सुनिए....
पिताजी, पत्रकार का प्यार कलम और सिद्धांत खबर है,
बेटा शादी कर ले कैसे भी, तेरी यही उमर है..
पिताजी देखो शादी तो अब मैं कर ना पाऊंगा,
पत्रकार बना हूं इसलिए, शायद कुंवारा ही मर जाऊंगा..
बेटा ना कह ऐसा, इक आस तो हमारे मन में है,
क्या करूं पिताजी, पत्रकारिता मेरे भी तन-मन है..
पत्रकार क्या बना दिया तुझको, अब हमारी नहीं सुनता तू,
जगह-जगह शहनाई बजी है, लेकिन तेरे कानों पर नहीं रेंगती जूं..
कौन करेगा शादी मुझसे बोले पत्रकार प्यारे...
जिसको मिल गई लड़की समझों उसके वारे न्यारे....

अगर आपके दिलों को छुई हो तो कमेंट जरूर कीजिएगा...
आपके प्यार के इंतजार में
शुभम् शुक्ला

रविवार, 3 फ़रवरी 2013

कोशिशें नाकाम नहीं होती..ये सुना था और कोशिश करके अच्छा भी लगता है...लेकिन एक बात नहीं समझा कि किन हालातों में कोशिश करनी चाहिए। मैं अपने निजी जीवन की बात कर रहा हूं। आज ऐसे दोहराया पर खड़ा हूं कि न आगे जा पा रहा हूं औऱ न पीछे। नियति कैसी है और क्या कराएगी मुझे नहीं पता। बस इतना जानता हूं कि मैं या तो अपने जीवन के अंतिम पड़ाव पर हूं या फिर एक नया कल यहां से शुरू होने वाला है। बस इंतजार है तो उसका और उसके हां करने का। अभी तक कोई बात नहीं हुई उससे, लेकिन उसके बिना मानों जीवन अधूरा सा लगने लगा है। बहुत हिम्मत कर अपने बेहद करीबी को बताई तो मैंने अपने दिल की बात, लेकिन वहां से भी कुछ बेहतर होने की आशा नहीं बनी। बल्कि एक और नया सवाल खड़ा हो गया। खैर उसका नाम लेकर मै उसे चोट नहीं पहुंचाना चाहता। बस हकीकत में उसे अपने साथ देखना चाहता हूं। मेरी ख्वाहिश है उसके साथ अपना जीवन गुजारने की। हालांकि शायद मेरा परिवार साथ न दे। इंटरकास्ट....लेकिन भगवान पर भरोसा है। उससे जो मांगा है सच्चे दिल से शायद वह मुझे वो नसीब हो। लेकिन कोशिश करते हुए भी आज अपने आप को हारा महसूस कर रहा हूं। वो भी तब जब दो दिन तक उसके आसपास था और कहने को कुछ शब्द ही नहीं थे। शायद मैं उसे ठीक से समझा ही नहीं पाया हूं। अब सबकुछ मेरी करीबियों पर है। उन्हें भी शायद अजीब लगा हो, लेकिन हकीकत से कब तक भागता। किसी से अपने भीतर की टीस को कह नहीं सकता। इसलिए लिखने से ही अपना दर्द कम करने की कोशिश कर रहा हूं। आखिर क्यों वो सबकुछ समझते हुए भी कुछ कहने को तैयार नहीं है। क्यों शायद वो जानते हुए भी अनजान है। मैं उसे कैसे बताऊं सात साल से एक ही चेहरा आंखों के आगे और हमेशा उसे देखकर एक ऊर्जा सी मिलती रही। कभी उससे भी कुछ नहीं कहा। बस इंतजार करता रहा सही वक्त का। सही मायने तो उसने ही प्रेरित किया मुझे सही राह में जीने के लिए। कभी पढा़ई की ओर ध्यान नहीं दिया, लेकिन कॉलेज में टॉप भी किया तो उसके लिए, ताकी मैं कुछ बन सकु और उसे हासिल करने में मुझे कोई दिक्कत न हो। शायद अभी तक अपने सही पड़ाव पर नहीं पहुंचा हूं, इसलिए उससे कहने या कुछ करने की हिम्मत नहीं है। अपनो शब्दों को विराम दे रहा हूं। थका हूं और आंखें भी नम सी हैं। बस भगवान से दुआ यही है कि उससे मिला दे औऱ कुछ नहीं मांगना। 

रविवार, 20 नवंबर 2011

तुम....

लम्हा लम्हा वक्त गुजरता..

पनघठ पर गीत गुनगुनाती तुम..

रोज सुनता गीत तुम्हारे..

अगर शाम होते आती तुम..

मनचली हर एक अदा तुम्हारी..

इठलाती, शर्माती तुम..

क्यूं न मदहोश हो जाऊं मैं..

खुली ज़ुल्फ लहराती तुम..

सुबह की पहली किरण है जागी

काश मुझे रोज जगाती तुम..

अलबली सी बन बैठ मुझे..

कभी हंसाती कभी रूलाती तुम..

कहानियां किस्से बहुत सुने थे..

हकीकत मुझे समझाती तुम..

वक्त न ठहरा पास मेरे वो..

ठहरी मेरे पास थी तुम..

रोज होता दिदार तुम्हारा

आयना वो छोड़ गई थी तुम..

खुद न जागा मैं उन रातों में..

मुझे जगाया जिसने वो थी तुम..

प्यार मैं करता बहुत तुम्हे था..

प्यार करती कतराती तुम...

आज भी सोचता दिल ये मेरा..

काश मेरी हो जाओ तुम..

लम्हा लम्हा वक्त गुजरता..

पनघठ पर गीत गुनगुनाती तुम..

सोमवार, 21 मार्च 2011

विश्व कप 2003

वर्ष 2003 का विश्व कप दक्षिण अफ़्रीका में आयोजित किया गया. साथ ही ज़िम्बाब्वे और कीनिया में भी कुछ मैच खेले गए. पहली बार विश्व कप में 14 टीमों ने हिस्सा लिया. सात-सात टीमों को दो ग्रुपों में बाँटा गया. हर ग्रुप से शीर्ष तीन टीमों को सुपर सिक्स में जगह मिली और फिर चार टीमें सेमी फ़ाइनल में पहुँचीं. एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने वाली 11 टीमों के अलावा आईसीसी ट्रॉफ़ी की क्वालीफ़ाइंग तीन टीमों- कनाडा, नामीबिया और नीदरलैंड्स ने भी हिस्सा लिया. ग्रुप मैचों में ग्रुप ए से ज़िम्बाब्वे और ग्रुप बी से कीनिया का सुपर सिक्स में पहुँचना सबसे बड़ी घटना थी. इंग्लैंड, पाकिस्तान, दक्षिण अफ़्रीका और वेस्टइंडीज़ की टीमें पहले दौर में ही प्रतियोगिता से बाहर हो गईं. ग्रुप ए से भारत, ऑस्ट्रेलिया और ज़िम्बाब्वे की टीम सुपर सिक्स में पहुँची, तो ग्रुप बी से श्रीलंका, कीनिया और न्यूज़ीलैंड की टीम. भारत ने छह में से पाँच मैच जीते, तो ऑस्ट्रेलिया ने छह में से छह मैच. सुपर सिक्स में न्यूज़ीलैंड की टीम एक ही मैच जीत पाई. कीनिया की टीम भी एक ही मैच जीती लेकिन लीग मैचों के आधार पर अंक लेकर सुपर सिक्स में आने का उसे लाभ हुआ और उसने सेमी फ़ाइनल में जगह बनाई. भारत और ऑस्ट्रेलिया के अलावा श्रीलंका भी सेमी फ़ाइनल में पहुँचा. भारत का मुक़ाबला कीनिया से हुआ और ऑस्ट्रेलिया की टीम श्रीलंका से भिड़ी. सेमी फ़ाइनल में ऑस्ट्रेलिया और श्रीलंका का मैच विश्व चैम्पियन के लिए आसान नहीं रहा. श्रीलंका के गेंदबाज़ों की शानदार गेंदबाज़ी के कारण ऑस्ट्रेलिया की टीम 212 रन ही बना पाई. एंड्रयू साइमंड्स ने शानदार 91 रन बनाए. जबकि वास ने ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों को परेशान रखा. बारी जब श्रीलंका की बल्लेबाज़ी की आई, तो ऑस्ट्रेलिया के तेज़ गेंदबाज़ों ने बेहतरीन गेंदबाज़ी का प्रदर्शन किया. ब्रेट ली ने तीन शीर्ष बल्लेबाज़ों को आउट कर श्रीलंका को परेशान रखा. बारिश के कारण डकवर्थ लुईस नियम के तहत श्रीलंका की टीम 48 रन से हार गई. श्रीलंका ने 38.1 ओवर में सात विकेट पर 123 रन ही बनाए थे. दूसरे सेमी फ़ाइनल में भारत और कीनिया का मुक़ाबला हुआ. सौरभ गांगुली और सचिन तेंदुलकर की शानदार बल्लेबाज़ी की बदौलत भारत ने 91 रनों से आसान जीत दर्ज कर दूसरी बार विश्व कप के फ़ाइनल में जगह बनाई. लेकिन 20 साल बाद विश्व कप के फ़ाइनल में पहुँची भारतीय टीम की फ़ाइनल में दुर्दशा हुई. ऑस्ट्रेलिया ने पहले खेलते हुए 359 रनों का विशाल लक्ष्य खड़ा किया. जवाब में भारत की पूरी टीम 234 रन पर आउट हो गई. रिकी पोंटिंग ने धमाकेदार 140 रन बनाए तो डेमियन मार्टिन ने 88 रन. भारत की टीम 125 रन से हारी और ऑस्ट्रेलिया ने लगातार दूसरी बार विश्व कप पर क़ब्ज़ा किया.