रविवार, 3 फ़रवरी 2013

कोशिशें नाकाम नहीं होती..ये सुना था और कोशिश करके अच्छा भी लगता है...लेकिन एक बात नहीं समझा कि किन हालातों में कोशिश करनी चाहिए। मैं अपने निजी जीवन की बात कर रहा हूं। आज ऐसे दोहराया पर खड़ा हूं कि न आगे जा पा रहा हूं औऱ न पीछे। नियति कैसी है और क्या कराएगी मुझे नहीं पता। बस इतना जानता हूं कि मैं या तो अपने जीवन के अंतिम पड़ाव पर हूं या फिर एक नया कल यहां से शुरू होने वाला है। बस इंतजार है तो उसका और उसके हां करने का। अभी तक कोई बात नहीं हुई उससे, लेकिन उसके बिना मानों जीवन अधूरा सा लगने लगा है। बहुत हिम्मत कर अपने बेहद करीबी को बताई तो मैंने अपने दिल की बात, लेकिन वहां से भी कुछ बेहतर होने की आशा नहीं बनी। बल्कि एक और नया सवाल खड़ा हो गया। खैर उसका नाम लेकर मै उसे चोट नहीं पहुंचाना चाहता। बस हकीकत में उसे अपने साथ देखना चाहता हूं। मेरी ख्वाहिश है उसके साथ अपना जीवन गुजारने की। हालांकि शायद मेरा परिवार साथ न दे। इंटरकास्ट....लेकिन भगवान पर भरोसा है। उससे जो मांगा है सच्चे दिल से शायद वह मुझे वो नसीब हो। लेकिन कोशिश करते हुए भी आज अपने आप को हारा महसूस कर रहा हूं। वो भी तब जब दो दिन तक उसके आसपास था और कहने को कुछ शब्द ही नहीं थे। शायद मैं उसे ठीक से समझा ही नहीं पाया हूं। अब सबकुछ मेरी करीबियों पर है। उन्हें भी शायद अजीब लगा हो, लेकिन हकीकत से कब तक भागता। किसी से अपने भीतर की टीस को कह नहीं सकता। इसलिए लिखने से ही अपना दर्द कम करने की कोशिश कर रहा हूं। आखिर क्यों वो सबकुछ समझते हुए भी कुछ कहने को तैयार नहीं है। क्यों शायद वो जानते हुए भी अनजान है। मैं उसे कैसे बताऊं सात साल से एक ही चेहरा आंखों के आगे और हमेशा उसे देखकर एक ऊर्जा सी मिलती रही। कभी उससे भी कुछ नहीं कहा। बस इंतजार करता रहा सही वक्त का। सही मायने तो उसने ही प्रेरित किया मुझे सही राह में जीने के लिए। कभी पढा़ई की ओर ध्यान नहीं दिया, लेकिन कॉलेज में टॉप भी किया तो उसके लिए, ताकी मैं कुछ बन सकु और उसे हासिल करने में मुझे कोई दिक्कत न हो। शायद अभी तक अपने सही पड़ाव पर नहीं पहुंचा हूं, इसलिए उससे कहने या कुछ करने की हिम्मत नहीं है। अपनो शब्दों को विराम दे रहा हूं। थका हूं और आंखें भी नम सी हैं। बस भगवान से दुआ यही है कि उससे मिला दे औऱ कुछ नहीं मांगना। 

रविवार, 20 नवंबर 2011

तुम....

लम्हा लम्हा वक्त गुजरता..

पनघठ पर गीत गुनगुनाती तुम..

रोज सुनता गीत तुम्हारे..

अगर शाम होते आती तुम..

मनचली हर एक अदा तुम्हारी..

इठलाती, शर्माती तुम..

क्यूं न मदहोश हो जाऊं मैं..

खुली ज़ुल्फ लहराती तुम..

सुबह की पहली किरण है जागी

काश मुझे रोज जगाती तुम..

अलबली सी बन बैठ मुझे..

कभी हंसाती कभी रूलाती तुम..

कहानियां किस्से बहुत सुने थे..

हकीकत मुझे समझाती तुम..

वक्त न ठहरा पास मेरे वो..

ठहरी मेरे पास थी तुम..

रोज होता दिदार तुम्हारा

आयना वो छोड़ गई थी तुम..

खुद न जागा मैं उन रातों में..

मुझे जगाया जिसने वो थी तुम..

प्यार मैं करता बहुत तुम्हे था..

प्यार करती कतराती तुम...

आज भी सोचता दिल ये मेरा..

काश मेरी हो जाओ तुम..

लम्हा लम्हा वक्त गुजरता..

पनघठ पर गीत गुनगुनाती तुम..

सोमवार, 21 मार्च 2011

विश्व कप 2003

वर्ष 2003 का विश्व कप दक्षिण अफ़्रीका में आयोजित किया गया. साथ ही ज़िम्बाब्वे और कीनिया में भी कुछ मैच खेले गए. पहली बार विश्व कप में 14 टीमों ने हिस्सा लिया. सात-सात टीमों को दो ग्रुपों में बाँटा गया. हर ग्रुप से शीर्ष तीन टीमों को सुपर सिक्स में जगह मिली और फिर चार टीमें सेमी फ़ाइनल में पहुँचीं. एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने वाली 11 टीमों के अलावा आईसीसी ट्रॉफ़ी की क्वालीफ़ाइंग तीन टीमों- कनाडा, नामीबिया और नीदरलैंड्स ने भी हिस्सा लिया. ग्रुप मैचों में ग्रुप ए से ज़िम्बाब्वे और ग्रुप बी से कीनिया का सुपर सिक्स में पहुँचना सबसे बड़ी घटना थी. इंग्लैंड, पाकिस्तान, दक्षिण अफ़्रीका और वेस्टइंडीज़ की टीमें पहले दौर में ही प्रतियोगिता से बाहर हो गईं. ग्रुप ए से भारत, ऑस्ट्रेलिया और ज़िम्बाब्वे की टीम सुपर सिक्स में पहुँची, तो ग्रुप बी से श्रीलंका, कीनिया और न्यूज़ीलैंड की टीम. भारत ने छह में से पाँच मैच जीते, तो ऑस्ट्रेलिया ने छह में से छह मैच. सुपर सिक्स में न्यूज़ीलैंड की टीम एक ही मैच जीत पाई. कीनिया की टीम भी एक ही मैच जीती लेकिन लीग मैचों के आधार पर अंक लेकर सुपर सिक्स में आने का उसे लाभ हुआ और उसने सेमी फ़ाइनल में जगह बनाई. भारत और ऑस्ट्रेलिया के अलावा श्रीलंका भी सेमी फ़ाइनल में पहुँचा. भारत का मुक़ाबला कीनिया से हुआ और ऑस्ट्रेलिया की टीम श्रीलंका से भिड़ी. सेमी फ़ाइनल में ऑस्ट्रेलिया और श्रीलंका का मैच विश्व चैम्पियन के लिए आसान नहीं रहा. श्रीलंका के गेंदबाज़ों की शानदार गेंदबाज़ी के कारण ऑस्ट्रेलिया की टीम 212 रन ही बना पाई. एंड्रयू साइमंड्स ने शानदार 91 रन बनाए. जबकि वास ने ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों को परेशान रखा. बारी जब श्रीलंका की बल्लेबाज़ी की आई, तो ऑस्ट्रेलिया के तेज़ गेंदबाज़ों ने बेहतरीन गेंदबाज़ी का प्रदर्शन किया. ब्रेट ली ने तीन शीर्ष बल्लेबाज़ों को आउट कर श्रीलंका को परेशान रखा. बारिश के कारण डकवर्थ लुईस नियम के तहत श्रीलंका की टीम 48 रन से हार गई. श्रीलंका ने 38.1 ओवर में सात विकेट पर 123 रन ही बनाए थे. दूसरे सेमी फ़ाइनल में भारत और कीनिया का मुक़ाबला हुआ. सौरभ गांगुली और सचिन तेंदुलकर की शानदार बल्लेबाज़ी की बदौलत भारत ने 91 रनों से आसान जीत दर्ज कर दूसरी बार विश्व कप के फ़ाइनल में जगह बनाई. लेकिन 20 साल बाद विश्व कप के फ़ाइनल में पहुँची भारतीय टीम की फ़ाइनल में दुर्दशा हुई. ऑस्ट्रेलिया ने पहले खेलते हुए 359 रनों का विशाल लक्ष्य खड़ा किया. जवाब में भारत की पूरी टीम 234 रन पर आउट हो गई. रिकी पोंटिंग ने धमाकेदार 140 रन बनाए तो डेमियन मार्टिन ने 88 रन. भारत की टीम 125 रन से हारी और ऑस्ट्रेलिया ने लगातार दूसरी बार विश्व कप पर क़ब्ज़ा किया.

विश्व कप 1999

वर्ष 1983 के बाद एक बार फिर विश्व कप की मेजबानी इंग्लैंड को मिली. हालाँकि विश्व कप के कुछ मैच आयरलैंड, स्कॉटलैंड और नीदरलैंड्स में भी हुए. इस विश्व के स्वरूप में थोड़ा बदलाव हुआ. 12 टीमों को छह-छह के दो ग्रुपों में बाँटा गया. लेकिन अगले दौर में जाने का मौक़ा मिला सिर्फ़ छह टीमों को यानी हर ग्रुप की शीर्ष तीन टीमें. अगला दौर कहलाया सुपर सिक्स और इस दौर में एक ग्रुप की सभी तीन टीमों को दूसरे ग्रुप की सभी तीन टीमों से मैच खेलना पड़ा. फिर अंक के आधार पर चार टीमें सेमीफ़ाइनल में पहुँचीं. ग्रुप ए से दक्षिण अफ़्रीका, भारत और ज़िम्बाब्वे की टीम सुपर सिक्स में पहुँची, तो ग्रुप बी से मौक़ा मिला- पाकिस्तान, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड को. सुपर सिक्स में भारत पाकिस्तान से तो जीत गया लेकिन ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड ने उसे हरा दिया और भारतीय टीम सेमी फ़ाइनल में नहीं पहुँच पाई. ग्रुप स्तर के मैचों में प्रदर्शन से अलग सुपर सिक्स के लिए क्वालीफ़ाई करने वाली टीम के ख़िलाफ़ प्रदर्शन के आधार पर अंक आगे ले जाने के नियम का भारत को नुक़सान हुआ. जबकि पाकिस्तान को लाभ. पाकिस्तान ने भी सुपर सिक्स में एक ही मैच जीता लेकिन चूँकि क्वालीफ़ाई करने वाली टीमों को उसने ग्रुप मैचों में हराया था इसलिए सुपरसिक्स में वे अंक उसके खाते में जुड़ गए. पाकिस्तान के अलावा न्यूज़ीलैंड, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ़्रीका ने सेमी फ़ाइनल में जगह बनाई. सईद अनवर के शानदार शतक की बदौलत पाकिस्तान ने न्यूज़ीलैंड को हराकर फ़ाइनल में जगह बनाई. ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ़्रीका के बीच दूसरा सेमी फ़ाइनल अति रोमांचक रहा. साँस रोक देने वाले इस मैच में नतीजा तो टाई रहा. लेकिन सुपर सिक्स में रन गति के आधार पर दक्षिण अफ़्रीका से आगे रहने के कारण ऑस्ट्रेलिया को फ़ाइनल में जगह मिली. लॉर्ड्स में हुआ फ़ाइनल मैच एकतरफ़ा रहा और ऑस्ट्रेलिया ने पाकिस्तान को आठ विकेट से हराकर विश्व कप का ख़िताब अपने नाम किया.

विश्व कप 1996

एक नया मोड़ आया क्रिकेट के इतिहास में...
वर्ष 1996 में एक बार फिर विश्व कप का आयोजन भारतीय उपमहाद्वीप को मिला और इस बार भारत, पाकिस्तान और श्रीलंका ने इसकी संयुक्त मेजबानी की. इस विश्व कप में 12 देशों ने हिस्सा लिया. संयुक्त अरब अमीरात, नीदरलैंड्स और कीनिया ने पहली बार विश्व कप में भाग लिया. नीदरलैंड्स ने अपने पाँचों मैच गँवाए और संयुक्त अरब अमीरात ने एक मैच में जीत हासिल की लेकिन कीनिया ने वेस्टइंडीज़ को हराकर सबको चौंकाया. सभी 12 टीमों को छह-छह के दो ग्रुपों में बाँटा गया. दोनों ग्रुपों की शीर्ष चार टीमों को क्वार्टर फ़ाइनल में जगह मिली. वैसे तो 15 ओवर तक दो फ़ील्डरों के ही 30 गज के दायरे से बाहर रहने का नियम तो 1992 के विश्व कप से ही आया था लेकिन बल्लेबाज़ों ने इसका असली फ़ायदा वर्ष 1996 के विश्व कप से उठाना शुरू किया. सबसे ज़्यादा इसका लाभ उठाया तीन टीमों- श्रीलंका, भारत और ऑस्ट्रेलिया ने. इसी विश्व कप से तीसरे अंपायर की भी भूमिका शुरू हुई. इस विश्व कप में श्रीलंका में होने वाले मैचों को लेकर विवाद भी हुआ. विश्व कप के कुछ दिन पहले संदिग्ध तमिल विद्रोहियों के हमले में 90 लोग मारे गए थे. ऑस्ट्रेलिया और वेस्टइंडीज़ ने श्रीलंका में जाकर मैच खेलने से इनकार कर दिया. लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने ये दोनों मैच का विजेता श्रीलंका को घोषित कर दिया. श्रीलंका को इसका लाभ मिला और ग्रुप में उसकी टीम शीर्ष स्थान पर रही. ग्रुप बी में दक्षिण अफ़्रीका ने अपने सभी मैच जीते और उसे तगड़ा दावेदार भी माना जा रहा था. ग्रुप ए से अन्य टीमें जो क्वार्टर फ़ाइनल में पहुँचीं, वे थीं- ऑस्ट्रेलिया, भारत और वेस्टइंडीज़ की टीमें. ऑस्ट्रेलिया ने भी पाँच में से तीन मैच जीते और भारत ने भी तीन. ग्रुप बी से क्वार्टर फ़ाइनल में जगह बनाई दक्षिण अफ़्रीका, पाकिस्तान, न्यूज़ीलैंड और इंग्लैंड ने. क्वार्टर फ़ाइनल में इंग्लैंड का मुक़ाबला श्रीलंका से हुआ, तो भारत का मुक़ाबला अपने चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान से. दक्षिण अफ़्रीका की टीम भिड़ी वेस्टइंडीज़ से तो ऑस्ट्रेलिया के सामने थी वेस्टइंडीज़ की टीम. पहले सेमीफ़ाइनल में जयसूर्या की शानदार पारी रंग लाई और इंग्लैंड का विश्व कप से पत्ता साफ़ हो गया. भारत के ख़िलाफ़ मैच में पाकिस्तान के कप्तान वसीम अकरम ही नहीं खेल पाए. भारत के 287 रनों के जवाब में पाकिस्तान ने शुरुआत तो अच्छी की लेकिन एक बार खिलाड़ी आउट होना शुरू हुए तो फिर ताँता ही लग गया. पाकिस्तान की टीम 39 रनों से हार गई. ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ मैच में न्यूज़ीलैंड ने क्रिस हैरिस के 130 रनों की बदौलत 286 का बड़ा स्कोर खड़ा किया. लेकिन मार्क वॉ ने विश्व कप में अपनी तीसरा सैकड़ा जड़ा और अपनी टीम को सेमी फ़ाइनल में पहुँचा दिया.दूसरी ओर कीनिया के हाथों मिली हार से शर्मसार वेस्टइंडीज़ ने शानदार वापसी की और दक्षिण अफ़्रीका को 19 रनों से हराकर आख़िरी चार में जगह बनाई. लारा ने 111 रन बनाए. कोलकाता के ईडन गार्डन में भारत और श्रीलंका के बीच हुआ सेमी फ़ाइनल मैच काफ़ी नाटकीय रहा. एक लाख 10 हज़ार से ज़्यादा संख्या में मौजूद दर्शक भारत की तय मानी जा रही हार पचा नहीं पाए और हुडदंग पर उतर आए. श्रीलंका के 252 रनों के जवाब में भारत ने 120 रन पर अपने आठ विकेट गँवा दिए थे. पिच तो ऐसी हो गई कि गेंद कब कहाँ घूम रही थी, बल्लेबाज़ों के पल्ले कुछ भी नहीं पड़ रहा था. हुड़दंग के कारण आईसीसी ने श्रीलंका को विजेता घोषित कर दिया. हालाँकि उनकी जीत तो तय ही थी. ऑस्ट्रेलिया और वेस्टइंडीज़ का मैच भी क्रिकेट में उतार-चढ़ावा की एक रोमांचक दास्तां बना. पहले खेलते हुए एक समय ऑस्ट्रेलिया ने सिर्फ़ 15 रन पर चार विकेट गँवा दिए थे. लेकिन स्टुअर्ट लॉ और माइकल बेवन ने पारी संभाली और ऑस्ट्रेलिया 207 रन बनाने में कामयाब रहा. एक समय वेस्टइंडीज़ की जीत पक्की लग रही थी और 42वें ओवर में उसका स्कोर था दो विकेट पर 165 रन. लेकिन शेन वॉर्न ने चार विकेट लिए, कप्तान मार्क टेलर ने अच्छी रणनीति अपनाई और वेस्टइंडीज़ ने 37 रन पर अपने आठ विकेट गँवा दिए. कप्तान रिची रिचर्ड्सन 49 रन पर नाबाद रहे और खड़े देखते रहे. ऑस्ट्रेलिया की टीम पाँच रन से जीत गई. फ़ाइनल में ऑस्ट्रेलिया का मुक़ाबला श्रीलंका से हुआ. लेकिन इतने एकतरफ़ा फ़ाइनल की किसी ने कल्पना नहीं की थी. ऑस्ट्रेलिया ने पहले खेलते हुए मार्क टेलर के 74 रनों की मदद से 241 रन बनाए लेकिन श्रीलंका ने तीन विकेट के नुक़सान पर ही लक्ष्य हासिल कर लिया. किसी भी विश्व कप फ़ाइनल में एक खिलाड़ी ने इतना दमख़म नहीं दिखाया था, जैसा कि इस फ़ाइनल में अरविंद डी सिल्वा ने दिखाया. उन्होंने दो कैच पकड़े, तीन विकेट लिए और नाबाद 107 रनों की पारी खेली. श्रीलंका ने लाहौर के मैदान पर जीत हासिल की और पहली बार विश्व कप का ख़िताब हासिल किया. भारत और पाकिस्तान के बाद श्रीलंका ख़िताब जीतने वाला तीसरा एशियाई देश बना.

विश्व कप 1992

वर्ष 1992 में हुए विश्व कप की मेजबानी का मौक़ा मिला ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड को. इस विश्व कप में कई बदलाव किए गए. पहली बार दिन-रात के मैच हुए. मैच में खिलाड़ी रंगीन कपड़े पहनकर उतरे और उजले गेंदों का भी इस्तेमाल हुआ. अब पहले 15 ओवर के दौरान 30 गज के दायरे से बाहर सिर्फ़ दो खिलाड़ी ही रह सकते थे. इस नए नियम के कारण पिंच हिटर खिलाड़ी का जन्म हुआ और इस विश्व कप में इयन बॉथम ने यह तमग़ा हासिल किया. इसी विश्व कप में न्यूज़ीलैंड ने स्पिनर से गेंदबाज़ी की शुरुआत करके एक और नया प्रयोग किया. रंगभेद की नीति के कारण लगी पाबंदी हटने के बाद पहली बार दक्षिण अफ़्रीका की टीम ने इस विश्व कप में हिस्सा लिया. नौ टीमों ने इस विश्व कप में हिस्सा लिया. टीमों को किसी ग्रुप में नहीं बाँटा गया. राउंड-रॉबिन के आधार पर 36 मैच खेले गए और चार शीर्ष टीमों को सेमी फ़ाइनल में प्रवेश मिला. मौजूदा चैम्पियन और मेजबान ऑस्ट्रेलिया पर दबाव कुछ ज़्यादा ही था और उसे इसका नुक़सान ही हुआ. ऑस्ट्रेलिया की टीम अपना पहला मैच ही हार गई. ऑस्ट्रेलिया को दक्षिण अफ़्रीका ने भी हराया और इंग्लैंड ने भी. पाकिस्तान ने विश्व कप में अपनी शुरुआत काफ़ी ख़राब की. वेस्टइंडीज़ के ख़िलाफ़ पहला मैच वे 10 विकेट से हार गए. लेकिन उनके भाग्य ने पलटा खाया इंग्लैंड के ख़िलाफ़ मैच में. इंग्लैंड ने उन्हें सिर्फ़ 74 रन पर आउट कर दिया. लेकिन बारिश के कारण मैच रद्द हो गया और पाकिस्तान को एक अंक भी मिल गया जो बाद में उसके लिए काफ़ी अहम साबित हुआ. इसी एक अंक के अंतर के कारण ऑस्ट्रेलिया की टीम सेमी फ़ाइनल में नहीं पहुँच पाई और पाकिस्तान को मौक़ा मिला सेमी फ़ाइनल में जगह बनाने का. न्यूज़ीलैंड और इंग्लैंड की टीमों ने भी राउंड रॉबिन मुक़ाबले में अच्छा प्रदर्शन किया. न्यूज़ीलैंड ने आठ में से सात मैच जीते, तो इंग्लैंड ने आठ में से पाँच. पहली बार विश्व कप में खेल रही दक्षिण अफ़्रीका की टीम ने भी अच्छा प्रदर्शन किया और इंग्लैंड के बाद तीसरे नंबर पर रही और उसे सेमी फ़ाइनल में जगह मिली. भारत की टीम सिर्फ़ दो मैच ही जीत पाई. हाँ, उसने पाकिस्तान को हराने में ज़रूर सफलता पाई. इसके अलावा उसे ज़िम्बाब्वे के ख़िलाफ़ ही जीत मिल पाई. सेमी फ़ाइनल में न्यूज़ीलैंड का मुक़ाबला पाकिस्तान से हुआ तो दक्षिण अफ़्रीका की टीम इंग्लैंड से भिड़ी. पहले सेमी फ़ाइनल में पाकिस्तान को जीत के लिए 263 रनों का लक्ष्य मिला जिसे उन्होंने पूरा कर लिया और पहली बार फ़ाइनल में जगह बनाई. इंज़माम ने 60 रन बनाए तो मियाँदाद ने 57 रन. दूसरे सेमी फ़ाइनल में बारिश के कारण दक्षिण अफ़्रीका की जीतने की उम्मीदों पर पानी फिर गया. बारिश के कारण लक्ष्य फिर से निर्धारित करने के नए नियम की गाज दक्षिण अफ़्रीका पर गिरी. एक समय दक्षिण अफ़्रीका को जीत के लिए 13 गेंद पर 22 रन चाहिए थे. लेकिन बारिश क्या आई, लक्ष्य फिर से निर्धारित हुआ और फिर दक्षिण अफ़्रीका को एक गेंद पर 21 रन बनाने का लक्ष्य दिया गया. और इस तरह 20 रन से हारकर दक्षिण अफ़्रीका की उसके पहले विश्व कप से दुर्भाग्यपूर्ण विदाई हुई. फ़ाइनल में पाकिस्तान के सामने थी इंग्लैंड की टीम. पाकिस्तान की टीम आक्रमक मूड में थी. डेरेक प्रिंगल ने 22 रन पर तीन विकेट लिए और पाकिस्तान के सलामी बल्लेबाज़ों को चलता कर दिया. लेकिन उसके बाद इमरान ख़ान (72) और जावेद मियाँदाद (58) ने पाकिस्तानी पारी संभाली. इंज़माम ने भी 42 रन बनाए और वसीम अकरम ने फटाफट 33 रन. पाकिस्तान ने 50 ओवर में छह विकेट पर 249 रन बनाए. जवाब में इंग्लैंड की शुरुआत की ख़राब रही और उसके चार विकेट सिर्फ़ 69 रन पर गिर गए. लेकिन नील फ़ेयरब्रदर और एलेन लैम्ब ने पारी संभाली. लेकिन लैंब और क्रिस लुईस को लगातार गेंदों पर चलता कर अकरम ने पाकिस्तान की जीत पक्की कर दी. पाकिस्तान ने 22 रन से जीत हासिल की और पहली बार विश्व कप का ख़िताब जीता.

विश्व कप 1987

लगातार तीन विश्व कप की मेजबानी के बाद वर्ष 1987 के विश्व कप की मेजबानी भारत और पाकिस्तान को संयुक्त रूप से मिली. यह कहना ग़लत नहीं होगा कि 1983 के विश्व कप में जीत हासिल करने के कारण भारतीय उपमहाद्वीप का दावा मज़बूत हुआ. भारत में क्रिकेट की लोकप्रियता उठान पर थी. मैच का स्वरूप तो वही रहा लेकिन ओवर घटाकर 50 ओवर कर दिए गए. इसी विश्व कप से मैचों में निष्पक्ष अंपायरिंग के लिए दो देशों के मैच में तीसरे देश के अंपायर रखे जाने लगे. ग्रुप ए में भारत, ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड और ज़िम्बाब्वे की टीमें थी, तो ग्रुप बी में पाकिस्तान, इंग्लैंड, वेस्टइंडीज़ और श्रीलंका की टीमें थी. भारत की टीम ने ग्रुप मुक़ाबले में शानदार प्रदर्शन किया. ऑस्ट्रेलिया से उसका मुक़ाबला ज़बरदस्त रहा. दोनों ने एक-एक बार एक-दूसरे को हराया. लेकिन रन गति के आधार पर भारत को अपने ग्रुप में शीर्ष स्थान मिला. न्यूज़ीलैंड की टीम सिर्फ़ दो मैच जीत पाई जबकि ज़िम्बाब्वे के हिस्से में कोई जीत नहीं आई. ग्रुप बी से पाकिस्तान की टीम ने बेहतरीन प्रदर्शन किया और शीर्ष स्थान हासिल किया. इंग्लैंड की टीम ने ठीक-ठाक प्रदर्शन किया लेकिन दूसरे नंबर पर आ ही गई. पहली बार वेस्टइंडीज़ की टीम सेमी फ़ाइनल में भी नहीं पहुँच पाई. हालाँकि उन्होंने श्रीलंका को 191 रनों के बड़े अंतर से हराया. पहले सेमी फ़ाइनल में ऑस्ट्रेलिया का मुक़ाबला पाकिस्तान से हुआ. लाहौर में हुआ यह मैच काफ़ी रोमांचक रहा. ऑस्ट्रेलिया ने पहले खेलते हुए आठ विकेट पर 267 रन बनाए. हालाँकि इमरान ख़ान ने तीन विकेट चटकाए. लेकिन डेविड बून ने 65 और वेलेटा ने 48 रन बनाए. स्टीव वॉ ने आख़िरी ओवर में 18 रन बनाए. जवाब में पाकिस्तान ने 38 रन पर ही तीन विकेट गिर गए. इमरान ख़ान और जावेद मियाँदाद ने पारी संभालने की कोशिश की लेकिन उनके आउट होते ही पाकिस्तान की पारी लड़ख़ड़ा गई. मियाँदाद ने 70 और इमरान ने मैकडरमॉट ने पाँच विकेट लिए और ऑस्ट्रेलिया ने दूसरी बार फ़ाइनल में जगह बनाई. दूसरे सेमी फ़ाइनल में मेजबान भारत का मुक़ाबला था इंग्लैंड से. मुंबई की पिच पर ग्राहम गूच और माइक गैटिंग ने स्वीप शॉट खेल-खेलकर भारतीय गेंदबाज़ों के छक्के छुड़ा दिए और 19 ओवर में 117 रन बना डाले. गूच ने 115 रनों की पारी खेली और गैटिंग ने 56 रन बनाए. इंग्लैंड ने 50 ओवर में छह विकेट पर 254 रन बनाए. भारत के लिए यह स्कोर भारी पड़ा और पूरी टीम 219 रन बनाकर आउट हो गई. अज़हरुद्दीन ने 64 रन बनाए, श्रीकांत ने 31 और कपिल देव ने 30. भारत की टीम 35 रनों से हारकर विश्व कप से बाहर हो गई. फ़ाइनल में इंग्लैंड का मुक़ाबला हुआ ऑस्ट्रेलिया से. जानकारों के मुताबिक़ यह विश्व कप में ऑस्ट्रेलिया के दबदबे की शुरुआत थी. ऑस्ट्रेलिया ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाज़ी का फ़ैसला किया. डेविड बून और ज्योफ़ मार्श ने पारी की शुरुआत की और अच्छे रन बटोरे. डेविड बून ने सर्वाधिक 75 रन बनाए. वेलेटा 45 रन पर नाबाद रहे जबकि डीन जोंस ने 33 रन बनाए. ऑस्ट्रेलिया ने 50 ओवर में पाँच विकेट पर 253 रन बनाए. जब तक माइक गैटिंग पिच पर थे, ये लग रहा था कि इंग्लैंड जीत सकता है. लेकिन उनके और एलेन लैंब के आउट होते ही इंग्लैंड की पारी लड़खड़ा गई. एक बार फिर वे दुर्भाग्यशाली रहे और विश्व कप का ख़िताब उनसे दूर रह गया. ऑस्ट्रेलिया ने सात रन से जीत हासिल कर विश्व कप पर पहली बार क़ब्ज़ा जमाया.