गुरुवार, 8 अप्रैल 2010

सभी हुए शिकार........

जब तक देश के आंतरीक हालात नहीं सुधरते तब तक किसी और समस्या से निजात पाने के बारे में सोचना बेमानी है... ऐसे में भी हमारी सरकार नक्सलवाद को गंभीरता से नहीं ले रहा है... रोज कुछ न कुछ इस विषय के बारे में सुनने को मिलता है ....... मेरा मानना ये है कि नक्सलवाद देश का सबसे बड़ा दुश्मन है..... हमारे गृहमंत्री का कहना है कि अगले २ ३ सालो में इस समस्या से पार पा लिया जाएगा... पिछले कुछ सालो में नक्सलवाद कुछ ज्यादा ही सक्रीय हो गया है..... खासतौर पर छत्तीसगढ और झारखंड में इसने बढी तेजी से पैर पसारे हैं........ हालांकी हमारी सरकार का कहना है कि इस पर लगाम लगा ली जाएगी.... लेकिन सरकार का जैसा रवैया अभी तक रहा है उसे देख कर नहीं लगता की कुछ समाधान निकलने की उम्मीद है........कुछ लोगों का कहना है कि हथियार के बल पर नक्सल समस्या नहीं सुलझायी जा सकती बर्शते माओवादियों को बातचीत कर अपनी समस्याओं को सामने रखना चाहिए..... परन्तु अगर हम देखें तो इस मुद्दे पर हमारी सरकार ही पूरी तरह से जिम्मेदार हैं.... नासूर की तरह बढ़ती नक्सल समस्या ने देश के कई जवानों की जान ली है..... कोई महीना ऐसा नहीं बीत रहा है जिसमें नक्सली वारदात न हुई हो... चाहे वे जवान हों या फिर वहां रहने वाले आदिवासी, सब ही की जान नक्सलवादी हमलों में गई लेकिन इनकी मौत की जिम्मेदारी से सरकार अपना मुहं नहीं मोड सकती....... लेकिन सबसे पहले राज्य सरकार इसके लिए जिम्मेदार है.... प्रदेश में कानून व्यवस्था बनाए रखना राज्य सरकार का काम होता है.....

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